‘नेताजी’

अब तो,वदल जाओ;

लगे॒ हैं,जागने हम भी

अधिक न इतराओ‘;

समय की मांगकहकर

,अब हमें बहकाओ;

नेताजीकरो नेतागिरी

लेकिन,संभल जाओ;

भाषा और बोली से

,हम को अलगाओ;

ऊब चूके हैहम-सब‘;

हमें,अब मत भटकाओ

हो सके तो,हम सबको;

करीब लाओ, प्यार से

अपने देश को अपनाओ;

प्रेम व अशिर्बाद से

अपना ताज सजाओ;

अब वोट बैंक छोडो

देश को फिर से जोड़ो