मेरी व्यथा
देश की हालत
कर रहे है बयान:
जान की बाजी लगा
रहें हमारे जवान:
पर कब तक देंगे
हम कुर्बानी:
शहीदों के परिवार की
है, ‘यह कहानी’:
पहले बाँट दिया
हमारा हिन्दोस्तान:
सियासतों के चाल ने
न रक्खा हमारा मान:
फिर बाँट दिया
हमारे धर्म को:
संदेह से देखते
हम एक दूसरे को:
बाकी बचा था प्रदेश
उसे भी बाँट दिया:
राज नेताओ ने जमकर
इसका ताज लिया
हर घटनाओ के
बाद होता है घोषणा:
करोरो का हो चाहे
हमें है रोकना:
कहते है यहाँ
पर है ‘लोकतंत्र’:
पर, चल रहे है सब
जैसे मशीनी यंत्र:
‘कर’ देना ही है
अब हमारा काम:
क्यों की हम सब है
सिर्फ —–आम:
धनी हो गए, यहाँ
हमारे सभी लीडर:
अंग रक्षक है,इनके
चलते है निडर:
सच्चा नेता एक दिन
अवश्य आगेगा:
देश की को स्तिथि
फिर से बदलेगा:
गांधीजी,शाश्त्रीजी
जैसा कोई मिले:
जिस से, देश फिर
कभी न हिले:
वब्दे मातरम
aapka kadradan 3:04 पूर्वाह्न on अक्टूबर 1, 2009 परमालिंक |
sun sun karti hawa raat bhar, jhare se mai marta hoo , thithur thitur kar kisi tarah mai, yatra poori karta hoo ………
rina56 10:26 पूर्वाह्न on अक्टूबर 2, 2009 परमालिंक |
आपने बचपन के यादों को याद दिलाने मे सहायता किया. तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ.
rina56
rina56 11:01 अपराह्न on फ़रवरी 11, 2010 परमालिंक |
If possible write the full poem, i m also ur kadrdan